रक्शाहाड़ा जलप्रपात - कांकेर (छत्तीसगढ़ ) Rakshahada waterfall chhattisgarh
रकशा हाडा जलप्रपात (Rakshahada Waterfall) कांकेर जिले के अंतागढ़ वन प्रभाग में स्थित एक रहस्यमयी और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर स्थान है, जो अपनी पौराणिक मान्यताओं और एकांत के लिए जाना जाता है।
कांकेर जिला मुख्यालय से लगभग 66 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच स्थित है और यह छत्तीसगढ़ के सबसे अनोखे प्राकृतिक स्थलों में से एक है। यह जलप्रपात एक शांत चट्टानी बेसिन में गिरता है, जहाँ मुख्य पर्यटन स्थलों की भीड़-भाड़ नहीं होती, जिससे यहाँ का वातावरण बेहद सुकून भरा रहता है।
अनोखी मान्यता और रहस्य: इसका नाम छत्तीसगढ़ी शब्दों 'रक्शा' (राक्षस) और 'हाड़ा' (हड्डी) से मिलकर बना है। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान यहाँ राक्षसों का वध किया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहाँ पाए जाने वाले कुछ पत्थरों को आपस में रगड़ने या जलाने पर हड्डियों के जलने जैसी महक आती है।
रोमांचक ट्रेकिंग: जलप्रपात तक सीधे कोई पक्की सड़क नहीं जाती है। यहाँ पहुँचने के लिए तरादुल के आगे सिल्लीबहार गाँव से लगभग 5 किलोमीटर की पैदल यात्रा (ट्रेक) करनी पड़ती है। यह रास्ता घने पर्णपाती जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों से होकर गुजरता है।
ऊंचाई: यह मुख्य रूप से एक मौसमी जलप्रपात है, जो चट्टानी पहाड़ी से लगभग 280 फीट की ऊंचाई से गिरता है। आसपास के इलाके में कुछ छोटे (मिनी) झरने भी मौजूद हैं।
जाने का सही समय: मानसून के दौरान या बारिश के ठीक बाद का समय (सितंबर से नवंबर) यहाँ जाने के लिए सबसे बेहतरीन है। इस दौरान जंगल पूरी तरह से हरे-भरे होते हैं और झरने में भरपूर पानी होता है।
क्या आप इस जलप्रपात की यात्रा की योजना बना रहे हैं, या आप कांकेर जिले के 'राम वन गमन परिपथ' से जुड़े किसी अन्य स्थान के बारे में जानना चाहते हैं?
