छत्तीसगढ़ की जनजातीय गीत Chhattisgarh Janjatiya Geet GK

छत्तीसगढ़ की जनजातीय गीत: एक सांस्कृतिक धरोहर

छत्तीसगढ़, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध जनजातीय समुदायों के लिए जाना जाता है। यहाँ की जनजातीय गीत- संगीत न केवल मनोरंजन का माध्यम हैं, 


बल्कि वे जीवन के विविध पहलुओं, लोककथाओं, और परंपराओं का जीवंत दस्तावेज भी हैं। इस ब्लॉग में हम छत्तीसगढ़ की जनजातीय गीतों की खूबसूरती, उनकी विशेषताएं और सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा करेंगे।

छत्तीसगढ़ जनजातीय गीत कुछ इस प्रकार है

  1. फसल वाले गीत- छेरता गीत, तारा गीत, करमा गीत
  2. विवाह गीत – रीलोगीत, कोटनी गीत
  3. मृत्यु गीत – घोटुल पाटा
  4. अन्य गीत – चइत परव गीत, लेजागीत, धनकुल / जगारगीत, लिंगोपेन गीत, गौरा गौरी गीत

फसल वाले गीत

1. छेरता गीत-

  • छेरतागीत अन्नदान का महापर्व छेराछेरा के अवसर पर गाया जाता है।
  • नई फसल का खलिहान से घर आने की खुशी में बस्तर अंचल में प्रतिवर्ष पौष पूर्णिमा के दिन छेरछेरा उत्सव के अवसर पर बालक- बालिकाओं द्वारा हल्बी एवं भतरी बोली में यह गीत गाया जाता है।
  • इस दिन सुबह से ही बच्चे, युवक व युवतियाँ घर-घर जाकर छेरछेरा (अन्न का दान) मांगते हुए “छेरछेरा, कोठी के धान ला हेरहेरा” गीत गाते हैं। ·

2. तारा गीत

  • नई फसल आने की खुशी में यह गीत नवयुवतियों द्वारा हल्बी व भतरी में गाया जाता है।
  • तारागीत पौष की रात्रि में समूह में गाया जाता है तथा अन्त में नवयुवतियाँ पिकनिक मनाती हैं।

3. करमा गीत

  • किवंदती के अनुसार कर्मसेनी वृक्ष की शाखा का देवता के रूप में स्थापना करके उसका पूजन किया जाता है तथा विजयादशमी से लेकर वर्षा ऋतु के आगमन तक करमा गीत गाया जाता है और इसके साथ ही करमा नृत्य किया जाता है। · विवाह गीत
  • यह मनोजन गीत है तथा किसी भी स्थिति पर यह गीत रचा जाता है, इसके भाव बड़े सुंदर होते हैं तथा पाल का नाम न लेकर उसे किसी अन्य शब्द (प्यार भरा संबोधन) से संबोधित किया जाता है। जैसे- गोलेंदा जोड़ा, जवारा, भोजली आदि ।
  • करमा गीत गाते समय मांदर बजाया जाता है, इसके आयोजन स्थल को ” अंखरा” कहा जाता है।

4. रीलो गीत

  • रीलो गीत हल्बी में मुरिया एवं माड़िया जनजातियों द्वारा विवाह के अवसर पर गाया जाता है।
  • गायक नृत्य की मुद्रा में रहते हैं तथा मांदरी वाद्य बजाकर गीत गाते

विवाह गीत 

छत्तीसगढ़ के विवाह गीतों में रीलोगीत और कोटनी गीत विशेष स्थान रखते हैं। ये गीत शादी के विभिन्न रस्मों और उत्सवों में गाए जाते हैं और सामाजिक-सांस्कृतिक भावनाओं को प्रकट करते हैं।

1 रीलोगीत

  • रीलोगीत: रीलोगीत छत्तीसगढ़ के विवाह का एक प्रमुख लोकगीत है, जो खासतौर पर लड़के के घर में गाया जाता है। इसमें दूल्हे-दुल्हन की खूबियों, उनकी खुशियों और शादी के उत्साह को व्यक्त किया जाता है। यह गीत जीवन की नई शुरुआत की उमंग और परिवार की खुशहाली का संदेश देते हैं।

2 कोटनी गीत
  • कोटनी गीत: कोटनी गीत विवाह के दौरान गाए जाने वाले पारंपरिक गीत हैं, जो दुल्हन के विदाई से जुड़े भावों को दर्शाते हैं। इन गीतों में विदाई की पीड़ा, परिवार से बिछड़ने का दुख और नए जीवन की उम्मीदों का संगम होता है। कोटनी गीतों की भाषा सरल और भावपूर्ण होती है, जो भावनाओं को सीधे दिल तक पहुंचाती है।

ये दोनों गीत छत्तीसगढ़ के विवाह संस्कारों में भावनात्मक और सांस्कृतिक गहराई जोड़ते हैं, जो समारोह को और भी खास बनाते हैं। अगर आप चाहें, तो मैं इन गीतों के कुछ उदाहरण भी साझा कर सकता हूँ।

मृत्यु गीत – घोटुल पाटा

छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति में मृत्यु गीतों का भी महत्वपूर्ण स्थान है, जिनमें से घोटुल पाटा एक प्रमुख प्रकार है।


घोटुल पाटा
 
  • मृत्यु संस्कार से जुड़े गीत होते हैं, जो जनजातीय समुदायों द्वारा मृतक की आत्मा की शांति और उसके प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करने के लिए गाए जाते हैं। ये गीत शोक और शांति दोनों भावों को अभिव्यक्त करते हैं।
  • इन गीतों में जीवन और मृत्यु के चक्र, आत्मा के सफर, और परिवार तथा समुदाय के सदस्यों के दुख को संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया जाता है।
  • घोटुल पाटा गीतों में पारंपरिक वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल होता है, जो वातावरण को गंभीर और आध्यात्मिक बनाते हैं।

ये गीत मृतक की याद को सम्मानित करते हुए जीवन के चिरस्थायी सत्य को दर्शाते हैं और समुदाय को सांत्वना देते हैं।


अन्य गीत – चइत परव गीत, लेजागीत, धनकुल / जगारगीत, लिंगोपेन गीत, गौरा गौरी गीत

छत्तीसगढ़ की जनजातीय और लोक संस्कृति में विभिन्न अवसरों और त्योहारों पर गाए जाने वाले अनेक गीत होते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:

  • चइत परव गीत: यह गीत छत्तीसगढ़ के चैत त्योहार के दौरान गाये जाते हैं, जो बसंत ऋतु का स्वागत करते हैं। ये गीत प्रकृति की सुंदरता, प्रेम, और नवीनता का उत्सव मनाते हैं।

  • लेजागीत: लेजागीत विवाह और सामाजिक उत्सवों से जुड़े गीत होते हैं, जो खुशी और उल्लास को दर्शाते हैं। ये गीत पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ गाए जाते हैं।

  • धनकुल / जगार गीत: ये गीत विशेष रूप से देवी-देवताओं की पूजा और जागर (धार्मिक उत्सव) में गाए जाते हैं। इन गीतों में धार्मिक भावनाएँ, लोककथाएँ, और आध्यात्मिक कथाएँ होती हैं।

  • लिंगोपेन गीत: यह गीत स्थानीय जनजातीय परंपराओं से जुड़े होते हैं, जिनमें पारंपरिक जीवन शैली, रीति-रिवाज, और सामाजिक नैतिकताओं का चित्रण होता है।

  • गौरा गौरी गीत: गौरा गौरी त्योहार पर गाए जाने वाले ये गीत शिव और पार्वती की पूजा से संबंधित होते हैं। ये गीत विवाह, प्रेम और परिवार के महत्व को दर्शाते हैं।

जनजातीय गीतों का महत्व

छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदायों के लिए गीत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। ये गीत न केवल उत्सवों और त्योहारों में गाए जाते हैं, बल्कि वे सामाजिक और धार्मिक आयोजनों का भी हिस्सा होते हैं। हर गीत एक कहानी कहता है, जो उनकी धरती, प्रकृति, प्रेम, वीरता और दैनिक संघर्षों को दर्शाता है।

प्रमुख जनजातीय गीत और उनकी विशेषताएं

  • डांडिया गीत: यह गीत खासतौर पर डांडिया नृत्य के दौरान गाए जाते हैं, जो छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का हिस्सा हैं। संगीत में ढोलक, मंजीरा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का उपयोग होता है।
  • सुआ गीत: यह गीत सुआ नृत्य के साथ जुड़े होते हैं, जो मुख्यतः महिलाएं गाती हैं। सुआ गीतों में प्रकृति की पूजा और सामाजिक संदेश होते हैं।
  • पंथी गीत: पंथी नृत्य के साथ जुड़े ये गीत धार्मिक और आध्यात्मिक कथाओं को प्रस्तुत करते हैं, खासकर रघुवंशी समाज में।
  • राउत नाच और गीत: यह गीत राउत समुदाय के त्योहारों और उत्सवों में प्रमुख होते हैं, जिनमें गायन और नृत्य का अनूठा मेल होता है।

जनजातीय गीतों की भाषा और संगीत

छत्तीसगढ़ की जनजातीय गीतों की भाषाएँ मुख्यतः गोंडी, कुड़ुख, बिलासी, और अन्य स्थानीय बोलियों में होती हैं। संगीत में पारंपरिक वाद्य यंत्र जैसे ढोल, मंजीरा, बांसुरी और मांड़ का प्रयोग होता है, जो गीतों को जीवंतता प्रदान करते हैं। इन गीतों की लय और धुनें सुनने वालों को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक गहराई में ले जाती हैं।

संरक्षण और आधुनिक युग में जनजातीय गीत

आज के युग में जनजातीय गीतों की पहचान और संरक्षण एक बड़ी चुनौती है। हालांकि कई लोक कलाकार और सांस्कृतिक संस्थान इन गीतों को संरक्षित करने और नए पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और संगीत समारोह भी जनजातीय गीतों को व्यापक पहचान दिलाने में मदद कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के जनजातीय गीत उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का एक सुंदर माध्यम हैं, जो हमें उनकी जीवनशैली, विश्वास और सामाजिकता की झलक दिखाते हैं। अगली बार जब आप छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर की बात करें, तो इन गीतों की मधुरता और उनकी कहानियों को भी जरूर याद करें।

आशा है यह ब्लॉग आपको छत्तीसगढ़ की जनजातीय गीतों की दुनिया से रूबरू करा पाया होगा। अगली बार हम छत्तीसगढ़ के लोक नृत्यों की रंगीन दुनिया पर चर्चा करेंगे, तब तक जुड़े रहिए और अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते रहिए।

Admin

My name is Rakesh Singh, and I am the author and co-founder of this blog and digital site. My goal is to provide you with accurate information and to help you. It would give me great pleasure if you learned something from me.

Post a Comment

Previous Post Next Post

Stay Informed